तुम अग्नि की भीषण लपट ,
जलते हुआ अंगार हो !
तुम चंचलता की धृति चपल ,
तीखी प्रखर अधिसार हो !!
तुम खौलती जल निधी लहर ,
गतिमय पवन उनचास हो !!
तुम राष्ट्र के इतिहास हो !!
तुम क्रांति की आख्यायिका ,
भैरव प्रलय के गान हो !
तुम इन्द्र के द्रुदम्य पवी ,
तुम चिर अमर वलिदान हो !!
तुम कलिका के कोप हो ,
पशुपति रूद्र के भुलास हो !!
तुम राष्ट्र के इतिहास हो !!
भारत माँ का चरण सेवक
- प्रतीक गुप्ता
भारत माँ का चरण सेवक
- प्रतीक गुप्ता