Wednesday, 14 March 2012

तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!

पहले के दिन चले गए, जब किसान सोना उगता था ,
तब युद्ध शुरू होने पर, अपनी वीरता को जगाता था !
फिर शुरू हो अगये भेदभाव रंग, वर्ण और बेश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!

खड़ा कर दिया इस देश को मृत्यु के कगार पर,
नहीं भरोसा रह गया भाई वहिन के प्यार पर !
भारत बंधन में पद गया राग, द्वेष और कलेश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!

हे देश के वीर सपूतों सत्य की नवज्योति का निर्माण करो,
इस देश के प्रत्येक जवान में बलिदान का नव प्राण भरो !
सत्य का तेज चारों ओर फैले सन्देश है इस देश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!

माँ ने भारत देश के अपने आँचल में छुपाया,
इस देश ने माँ के लिए अपना शीश चडाया !
माँ का वीर सपूत है हर मनुष्य इस देश का ,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!

भारत माँ का चरण सेवक
- प्रतीक गुप्ता

Monday, 5 March 2012

एक अंगारा मिटटी का !!

मै बगियों का मधुर भंवर,
               मै पुष्पों का बहरा हूँ !
मै सूरज की अडिग किरण ,
                मै घर-घर का उजियारा हूँ !!
मै न अस्त होता कभी ,
                 अनंत कालीन सामना हूँ !
जब आन पड़े इस देश के लिए ,
                 मै मिटटी का अंगारा हूँ  !!


मै वीरों की तीखी वाणी ,
                      शत्रु का संहारा हूँ !
मै आँखों मै बसता उनका ,
                      रूद्र रूप निरंकारा हूँ !!
मै उनके ह्रदयों का कम्पन्न ,
                       साहस बल का सहारा हूँ !
जब आन पड़े इस देश के लिए ,
                       मै मिटटी का अंगारा हूँ  !!


में दीपक की लौ सा तेज
                       मै छोटा सा उजियारा हूँ !
मै लपटों से घिरा हुआ ,
                       भयंकर असीम ज्वाला हूँ !!
मै पवित्र बंधन का धागा ,
                        मै अग्नि रूप सकरा हूँ !
जब आन पड़े इस देश के लिए ,
                       मै मिटटी का अंगारा हूँ  !!

भारत माँ का चरण सेवक
- प्रतीक गुप्ता 



Monday, 27 February 2012

तुम राष्ट्र के इतिहास हो !!

तुम अग्नि की भीषण लपट ,
                       जलते हुआ अंगार हो !
तुम चंचलता की धृति चपल ,
                       तीखी प्रखर अधिसार हो !!
तुम खौलती जल निधी लहर ,
                     गतिमय पवन उनचास हो !!

तुम राष्ट्र के इतिहास हो !!

तुम क्रांति की आख्यायिका ,
                    भैरव प्रलय के गान हो !
तुम इन्द्र के द्रुदम्य पवी ,
                     तुम चिर अमर वलिदान हो !!
तुम कलिका के कोप हो ,
                     पशुपति रूद्र के भुलास हो !!

तुम राष्ट्र के इतिहास हो !!

भारत माँ का चरण सेवक
- प्रतीक गुप्ता