पहले के दिन चले गए, जब किसान सोना उगता था ,
तब युद्ध शुरू होने पर, अपनी वीरता को जगाता था !
फिर शुरू हो अगये भेदभाव रंग, वर्ण और बेश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
खड़ा कर दिया इस देश को मृत्यु के कगार पर,
नहीं भरोसा रह गया भाई वहिन के प्यार पर !
भारत बंधन में पद गया राग, द्वेष और कलेश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
हे देश के वीर सपूतों सत्य की नवज्योति का निर्माण करो,
इस देश के प्रत्येक जवान में बलिदान का नव प्राण भरो !
सत्य का तेज चारों ओर फैले सन्देश है इस देश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
माँ ने भारत देश के अपने आँचल में छुपाया,
इस देश ने माँ के लिए अपना शीश चडाया !
माँ का वीर सपूत है हर मनुष्य इस देश का ,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
तब युद्ध शुरू होने पर, अपनी वीरता को जगाता था !
फिर शुरू हो अगये भेदभाव रंग, वर्ण और बेश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
खड़ा कर दिया इस देश को मृत्यु के कगार पर,
नहीं भरोसा रह गया भाई वहिन के प्यार पर !
भारत बंधन में पद गया राग, द्वेष और कलेश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
हे देश के वीर सपूतों सत्य की नवज्योति का निर्माण करो,
इस देश के प्रत्येक जवान में बलिदान का नव प्राण भरो !
सत्य का तेज चारों ओर फैले सन्देश है इस देश का,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
माँ ने भारत देश के अपने आँचल में छुपाया,
इस देश ने माँ के लिए अपना शीश चडाया !
माँ का वीर सपूत है हर मनुष्य इस देश का ,
सुनो इस देश के जवानों तुम्हारे हाथ में भविष्य इस देश का !!
भारत माँ का चरण सेवक
- प्रतीक गुप्ता

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